Saturday, 30 September 2017

मुंबई के मोइनुद्दीन में सूरत के रमेश भाई का दिल धड़केगा

सूरत ( विद्रोही आवाज ) हार्ट डे के दिन सूरत के रहने वाले ब्रेनडेड रमेश का हार्ट मुंबई के रहने वाले मोइनुद्दीन को लगाया गया। सूरत के किरण हॉस्पिटल से 269 किमी की दूरी 107 मिनट में तय करके हार्ट को मुंबई के ग्लोबल हॉस्पिटल पहुंचाया गया। सूरत के वराछा रोड सिमड़ा गांव के रहने वाले 53 साल के रमेश भाई गोबर भाई धोराजिया कतारगाम स्थित सनराइज डायमंड फैक्ट्री में रत्नकलाकर थे। मंगलवार, 26 सितंबर को दोपहर 11 बजे बाथरूम गए थे, वहीं उन्हें चक्कर आया और वह बेहोश हो गए। इलाज के लिए उन्हें किरण हॉस्पिटल ले जाया गया। सिटी स्कैन करने के बाद न्यूरो सर्जन डॉक्टर भौमिक ठाकुर ने बताया कि उन्हें ब्रेन हैमरेज हो गया है। दो दिन बाद 28 सितंबर को डॉक्टर भौमिक ठाकुर और न्यूरो फिजिशियन डॉक्टर कुनाल नाथ ने रमेश भाई को ब्रेनडेड घोषित किया।
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269 किमी की दूरी 107 मिनट में तय कर मुंबई ले जाया गया हार्ट, सूरत से अब तक 16 हार्ट डोनेट----
रमेश भाई को ब्रेनडेड घोषित करने के बाद अस्पताल ने डोनेट लाइफ संस्था को इसकी जानकारी दी। संस्था प्रमुख नीलेश मांडलेवाला के सहयोग से रमेश के परिजनों को अंगदान करने के लिए तैयार किया गया। उसके बाद नीलेश ने अहमदाबाद स्थित आईकेडीआरसी अस्पताल के डॉक्‍टर प्रांजल मोदी, अहमदाबाद के सिम्स और स्टेलिंग अस्पताल से भी संपर्क किया गया, लेकिन हार्ट लेने वाला कोई मरीज नहीं था। इसके बाद रोटो संस्था की मदद से मुंबई के ग्लोबल अस्पताल से संपर्क कर दिल भेजा गया।
एक महीने से हार्ट के इंतजार में थे मोइनुद्दीन----  मुंबई के अंधेरी निवासी 46 साल के मोइनुद्दीन शेख ग्लोबल अस्पताल में दो दिन से एडमिट थे। डॉक्टरों के अनुसार मोइनुद्दीन का हार्ट महज 10 से 15 प्रतिशत ही काम कर रहा था। अस्पताल के कार्डियक सर्जन डॉक्टर अहमद शेख बताया कि 2012 से ही मोइनुद्दीन को दिल की बीमारी थी। एक महीने से ग्लोबल अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उन्हें हृदय ट्रांसप्लांट की जरूरत थी। रमेश भाई के हार्ट से उन्हें नया जीवन मिला है
सूरत से अब तक 16 हार्ट डोनेट--- सूरत से अबतक 16 हार्ट डोनेट हो चुकी है। इसके अलावा 224 किडनी, 89 लीवर, 6 पैंक्रियाज, 188 नेत्र दान भी किए गए हैं। इससे 520 लोगों को नया जीवन मिला है।
किडनी, लीवर, आंख का भी किया दान-- रमेश के हार्ट के साथ किडनी, लीवर अहमदाबाद के आईकेडीआरसी अस्पताल को दिया गया, जबकि आंख सूरत के चक्षु दान केंद्र को दान कर दी गई।

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