आसीन्द,24 सितंबर - महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या शासन श्री साध्वी श्री धन श्री जी के पावन सान्निध्य में तेरापंथ भवन में ज्ञानशाला रजत जयंती वर्ष समारोह का आयोजन हुवा।साध्वी श्री जी ने कहा कि ज्ञान का धरातल इतना ठोस होना चाहिए अर्थात नींव इतनी मजबूत होनी चाहिए कि उस पर कितनी ही मंजिला इमारत खड़ी की जा सके। इसके लिए आवश्यक है- ज्ञानशाला। ज्ञानशाला एक ऐसा प्रारूप है जिससे बच्चों में सद्संस्कारों का बीजारोपण हो सके। प्रशिक्षिकाए ध्यान दे कि बच्चा कैसे बोलता है,कैसे चलता है। बालक में व्यवहारिक ज्ञान होना अति आवश्यक है।विनम्रता, अनुशासन, विनयशीलता सरलता आदि गुण होने चाहिए। अभद्र भाषा न बोले, अहंकार न करे।धार्मिक एवं आध्यत्मिक संस्कारों से ही व्यक्ति आगे बढ़ सकता है। यह बचपन के ज्ञान की नींव पर निर्भर करता है।
साध्वी श्री शील यशा जी ने कहा कि आज के भौतिक युग मे बालक में धार्मिक संस्कार जरूरी है। और बचपन मे ही लक्ष्य निर्धारित करें एवं उसे साकार करें। साध्वी श्री सलिल यशा जी एवं विदित प्रभा जी ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
समारोह के मुख्य अतिथि श्रीमान गणेशलाल जी मेहता प्रधानाचार्य रा. सी. उ. मा. वि. आसीन्द ने कहा कि जीवन में अनुशासन का विशेष महत्व है। आचार्य तुलसी का यह कथन "निज पर शासन, फिर अनुशासन"अपने जीवन मे आत्मसात कर ले तो कोई विवाद नही होगा।मेने स्वयं ने इस कथन पर अमल करते हुए विद्यालय के छात्रों को भी यही शिक्षा प्रदान की।
ज्ञानशाला के नन्हें नन्हे बच्चो ने विभिन्न शिक्षाप्रद एवं ज्ञान वर्धक कार्यक्रम प्रस्तुत किये। ज्ञानशाला क्या, क्यो व कैसे? इन पर विविध लघु नाटिका समूहगान एवं परिसंवाद से सभी का मन मोहा। पूर्व ज्ञानार्थी श्रद्धा गोखरू एवं सोनम बाफना का श्रम सराहनीय रहा। ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियो के मंगलाचरण से समारोह का आगाज हुवा। ज्ञानशाला की प्रशिक्षिकाओ ने समूह गीत की प्रस्तुत दि। इस पूरे कार्यक्रम में प्रशिक्षिकाओ का श्रम सराहनीय रहा।
समारोह अध्यक्ष श्री उदय लाल जी धाकड़ शिशोदा ने भी अपने विचार व्यक्त किये।सभा अध्यक्ष श्रीमान भंवरलाल जी चोरडिया ने सभी आगंतुक मेहमानों का स्वागत किया। कार्यकारी अध्यक्ष कन्हैयालाल जी कांठेड़ एवं मंत्री अनिल गोखरू ने भी अपने विचार रखे। मुख्य प्रशिक्षिका श्रीमती अंजना देवी गोखरू ने ज्ञानशाला के पिछले 9 वर्ष का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया।
पिछले वर्ष प्रशिक्षक परीक्षा में उत्तीर्ण प्रशिक्षिकाओ को प्रमाण पत्र एवं पुरुस्कार से समानित किया गया।मुख्य अतिथि श्रीमान गणेश लाल जी मेहता के सेवा निवर्ती के अवसर पर तेरापंथ सभा द्वारा अभिनन्दन पत्र भेंट किया गया। ज्ञानशाला के सभी ज्ञानार्थियो को पुरुस्कार से सम्मानित किया गया।
दोलतगढ से समागत ज्ञानार्थियो को भी स्थानीय सभा द्वारा सम्मानित किया गया।
आभार श्रीमती कंचन देवी कांठेड़ ने किया।कार्यक्रम का सफल संचालन साध्वी शीलयशा जी ने किया।
इससे पूर्व प्रातः 8 बजे ज्ञानशाला के बालक बालिकाओं एवं समाज के सभी महानुभवों की नगर के विभिन्न मार्गों से होती हुई रैली पुनः तेरापंथ भवgन में पहुंच कर समारोह में परिवर्तित हुई। रैली में बालको द्वारा समणीयो एवं साध्वीयो की झांकी आकर्षण का केंद्र रही।सभी बच्चों काे पुरूस्कार वितरित किये गये
अन्जना गोखरू आसीन्द
साध्वी श्री शील यशा जी ने कहा कि आज के भौतिक युग मे बालक में धार्मिक संस्कार जरूरी है। और बचपन मे ही लक्ष्य निर्धारित करें एवं उसे साकार करें। साध्वी श्री सलिल यशा जी एवं विदित प्रभा जी ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
समारोह के मुख्य अतिथि श्रीमान गणेशलाल जी मेहता प्रधानाचार्य रा. सी. उ. मा. वि. आसीन्द ने कहा कि जीवन में अनुशासन का विशेष महत्व है। आचार्य तुलसी का यह कथन "निज पर शासन, फिर अनुशासन"अपने जीवन मे आत्मसात कर ले तो कोई विवाद नही होगा।मेने स्वयं ने इस कथन पर अमल करते हुए विद्यालय के छात्रों को भी यही शिक्षा प्रदान की।
ज्ञानशाला के नन्हें नन्हे बच्चो ने विभिन्न शिक्षाप्रद एवं ज्ञान वर्धक कार्यक्रम प्रस्तुत किये। ज्ञानशाला क्या, क्यो व कैसे? इन पर विविध लघु नाटिका समूहगान एवं परिसंवाद से सभी का मन मोहा। पूर्व ज्ञानार्थी श्रद्धा गोखरू एवं सोनम बाफना का श्रम सराहनीय रहा। ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियो के मंगलाचरण से समारोह का आगाज हुवा। ज्ञानशाला की प्रशिक्षिकाओ ने समूह गीत की प्रस्तुत दि। इस पूरे कार्यक्रम में प्रशिक्षिकाओ का श्रम सराहनीय रहा।
समारोह अध्यक्ष श्री उदय लाल जी धाकड़ शिशोदा ने भी अपने विचार व्यक्त किये।सभा अध्यक्ष श्रीमान भंवरलाल जी चोरडिया ने सभी आगंतुक मेहमानों का स्वागत किया। कार्यकारी अध्यक्ष कन्हैयालाल जी कांठेड़ एवं मंत्री अनिल गोखरू ने भी अपने विचार रखे। मुख्य प्रशिक्षिका श्रीमती अंजना देवी गोखरू ने ज्ञानशाला के पिछले 9 वर्ष का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया।
पिछले वर्ष प्रशिक्षक परीक्षा में उत्तीर्ण प्रशिक्षिकाओ को प्रमाण पत्र एवं पुरुस्कार से समानित किया गया।मुख्य अतिथि श्रीमान गणेश लाल जी मेहता के सेवा निवर्ती के अवसर पर तेरापंथ सभा द्वारा अभिनन्दन पत्र भेंट किया गया। ज्ञानशाला के सभी ज्ञानार्थियो को पुरुस्कार से सम्मानित किया गया।
दोलतगढ से समागत ज्ञानार्थियो को भी स्थानीय सभा द्वारा सम्मानित किया गया।
आभार श्रीमती कंचन देवी कांठेड़ ने किया।कार्यक्रम का सफल संचालन साध्वी शीलयशा जी ने किया।
इससे पूर्व प्रातः 8 बजे ज्ञानशाला के बालक बालिकाओं एवं समाज के सभी महानुभवों की नगर के विभिन्न मार्गों से होती हुई रैली पुनः तेरापंथ भवgन में पहुंच कर समारोह में परिवर्तित हुई। रैली में बालको द्वारा समणीयो एवं साध्वीयो की झांकी आकर्षण का केंद्र रही।सभी बच्चों काे पुरूस्कार वितरित किये गये
अन्जना गोखरू आसीन्द
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