Tuesday, 5 September 2017

1992 के बाद रेलवे बोर्ड में उठा सूरत की ट्रेन का मुद‌्दा, दिवाली से पहले समाधान

सूरत.सूरत में पिछले चार महीनों में रेल संघर्ष समिति के दो बड़े आंदोलनों ने आखिरकार रेलवे बोर्ड का ध्यान उत्तर भारतीयों की समस्या की तरफ खींचा है। बोर्ड द्वारा निर्देशित पैसेंजर सर्विस कमेटी (पीएससी) ने 20 साल में पहली बार गंभीरता के साथ सूरत और आसपास में रहने वाले करीब 20 लाख उत्तर भारतीयों की रेल संबंधी समस्याओं को रेल मंत्रालय के अधिकारियों के सामने रखा है।
कमेटी के सदस्य राकेश शाह सूरत के रहने वाले हैं। बीते 28 अगस्त को दिल्ली में रेल मंत्रालय में रेलवे बोर्ड के पांच आईआरएस अधिकारियों के साथ हुई बैठक में उन्होंने पीएससी के सचिव प्रथमेश पार्थ लाटे के साथ सूरत के यात्रियों की समस्याओं को पेश किया। शाह ने ट्रेन में चढ़ने के लिए 20-20 घंटे लाइन लगाने, टिकट काउंटरों पर अवैध वसूली, संघर्ष समिति बनाने जैसी समस्याएं बताकर कहा कि उत्तर भारतीयों के लिए नई ट्रेन का चलना जरूरी है।। सूरत की समस्याओं का प्रेजेंटेशन देखकर बोर्ड के अधिकारियों ने दीपावली से पहले इस मसले का ठोस समाधान (कंक्रीट सॉल्यूशन) निकालने का भरोसा दिलाया। बोर्ड के पांचों आईआरएस अधिकारियों ने कहा कि हम इस समस्या के तकनीकी पहलुओं को सुलझाकर इसे संभव बनाएंगे। सभी जोन के जीएम के साथ बैठक कर सूरत की साप्ताहिक ट्रेनों को रेगुलर बनाने की संभावना देखेंगे और नई ट्रेनों का प्रावधान  Read more 

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