सिरसा - जिनकी ताकत के आगे सरकारें और प्रभावशाली लोग भी सिर झुकाते थे, उस डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की हकीकत सामने लाने और रेप के मामले में उसे सजा दिलाने में सीबीआई के दो जांबाज अफसरों ने अहम भूमिका निभाई। उनके नाम हैं सतीश डागर और तत्कालीन डीआईजी मुलिंजा नारायणन। इन सीबीआई अफसरों ने राम रहीम के रसूख को खूंटी पर टांगकर उनका पूरा का पूरा किला ही ढहा दिया। इन दोनों अधिकारियों पर कई तरह के दबाव झेले। यह कहना भी अतिशयोक्ति नहीं होगी कि उन्होंने अपनी जान तक को दांव पर लगा दिया और झुकने से इनकार करते हुए, केस को आखिरकार अंजाम तक पहुंचाया
डागर ने साध्वियों को खोजा- 15 साल पहले डेरे में साध्वियों के साथ हुए यौन उत्पीड़न को पत्रकार रामचंदर छत्रपति ने उजागर किया था। 'पूरा सच' नाम का अखबार निकालने वाले छत्रपति ने डेरे का पूरा सच और एक गुमनाम पत्र अपने अखबार में छापा था, जिसमें साध्वियों के साथ बलात्कार की बात लिखी थी। पत्र के प्रकाशन के कुछ ही दिन के भीतर छत्रपति पर हमला हुआ और उनकी मौत हो गई। साध्वियों के भाई रंजीत की भी हत्या कर दी गई। जाहिर है कि इस केस की जांच में शामिल होने का सीधा मतलब था, अपनी जान को जोखिम में डालना। डर और दहशत के माहौल के बीच आरोप लगाने वाली साध्वियों को बयान दर्ज कराने के लिए सामने लाने सबसे बड़ी चुनौती थी। इस चुनौती को सीबीआई अफसर सतीश डागर ने अपने हाथ में लिया और पीड़ित साध्वियों को खोज निकाला।
डागर ने साध्वियों को खोजा- 15 साल पहले डेरे में साध्वियों के साथ हुए यौन उत्पीड़न को पत्रकार रामचंदर छत्रपति ने उजागर किया था। 'पूरा सच' नाम का अखबार निकालने वाले छत्रपति ने डेरे का पूरा सच और एक गुमनाम पत्र अपने अखबार में छापा था, जिसमें साध्वियों के साथ बलात्कार की बात लिखी थी। पत्र के प्रकाशन के कुछ ही दिन के भीतर छत्रपति पर हमला हुआ और उनकी मौत हो गई। साध्वियों के भाई रंजीत की भी हत्या कर दी गई। जाहिर है कि इस केस की जांच में शामिल होने का सीधा मतलब था, अपनी जान को जोखिम में डालना। डर और दहशत के माहौल के बीच आरोप लगाने वाली साध्वियों को बयान दर्ज कराने के लिए सामने लाने सबसे बड़ी चुनौती थी। इस चुनौती को सीबीआई अफसर सतीश डागर ने अपने हाथ में लिया और पीड़ित साध्वियों को खोज निकाला।

No comments:
Post a Comment