केंद्र की मोदी सरकार ने जातियों के आधार पर राजनीति और वोट बैंक को लेकर एक नया दांव खेला है. बुधवार को कैबिनेट की बैठक में केंद्र सरकार ने यह फैसला किया कि केन्द्र सरकार की नौकरियों में OBC की भीतर अलग-अलग जातियों को आरक्षण देने के लिए अब हर जाति का कोटा तय किया जाएगा. यानी कि पिछड़ा वर्ग के लिए जो आरक्षण है उसमें अब आरक्षण के भीतर आरक्षण की व्यवस्था होगी. ओबीसी कोटे के भीतर कोटा बनाने के लिए केंद्र सरकार जल्द ही एक समिति का गठन करेगी जो 12 हफ्तों के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी. आरक्षण के भीतर आरक्षण देने के लिए क्या तरीका अपनाया जाएगा और क्या इसका आधार जाति होगी या आर्थिक स्थिति इसका फैसला कमीशन पर छोड़ा गया है.
एक और फैसले में कैबिनेट ने आरक्षण का लाभ पाने के लिए क्रीमी लेयर की आमदनी का दायरा 6 लाख से बढ़ाकर 8 लाख सालाना कर दिया है. यानी जिन परिवारों की सालाना आमदनी 8 लाख रुपए तक है वह क्रीमी लेयर के भीतर नहीं आएंगे और उन्हें आरक्षण का लाभ मिलता रहेगा. कैबिनेट के फैसले के बारे में बताते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि OBC के आरक्षण का फायदा इसके भीतर आने वाली सभी जातियों को बराबरी से मिल सके.
केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि पिछड़ा वर्ग आयोग ने 2011 में ही यह सिफारिश की थी कि ओबीसी कोटे के भीतर आरक्षण का वर्गीकरण किया जाए. उसके बाद संसद की स्थाई समिति ने भी ऐसी सिफारिश की थी. जेटली ने दावा किया कि इस फैसले के लागू होने के बाद आरक्षण का फायदा मिलने में पक्षपात नहीं होगा और गैर बराबरी खत्म होगी.
केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने भी केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि उनकी लोक जनशक्ति पार्टी बहुत पहले से ही इसकी मांग करती रही है कि OBC के भीतर आरक्षण का वर्गीकरण किया जाना चाहिए. पासवान ने कहा कि बिहार समेत नौ अन्य राज्यों में पहले से ही अति पिछड़ा के आधार पर वर्गीकरण किया गया था.
माना जाता है कि बिहार में नीतीश कुमार की सफलता का एक बड़ा कारण यह था कि उन्होंने नए तरीके की सोशल इंजीनियरिंग करके पिछड़ों और दलितों के बीच में अति पिछड़ा और अति दलित का बंटवारा करकेअपने वोट बैंक को मजबूत किया . जानकारों के मुताबिक इस फैसले से सबसे ज्यादा झटका उत्तर भारत में और खास तौर पर उत्तर प्रदेश और बिहार में यादव जाति के लोगों को लगेगा जो अभी तक अपनी मजबूत आर्थिक और सामाजिक स्थिति की वजह से आरक्षण का फायदा लेने में सबसे आगे रहते थे.
यह बात भी जगजाहिर है कि बिहार और उत्तरप्रदेश में यादव जाति के ज्यादातर वोटर BJP के मुकाबले लालू यादव की आरजेडी और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के साथ ज्यादा मजबूती से खड़े होते हैं. इस फैसले से बीजेपी ओबीसी जातियों में यादव को छोड़कर दूसरे जातियों के बीच अपनी पकड़ को मजबूत बनाएगी.

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