प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी को जायज ठहराया, लेकिन मौतों पर चुप रहे
प्रस्ताव को बाद में लोकसभा में ध्वनि मत से पारित कर दिया गया, जबकि विपक्षी कांग्रेस तथा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने सदन से बहिर्गमन किया। प्रस्ताव के पारित होने के वक्त केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा तथा प्रस्ताव के अनुमोदक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त सदन से अनुपस्थित थे, जिसका विपक्ष विरोध कर रहा था।
कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रस्ताव में संशोधन का सुझाव देते हुए उसपर मत विभाजन की मांग की। वह प्रस्ताव में नोटबंदी के कारण 125 लोगों की मौतों का जिक्र करने की मांग कर रहे थे।
सिंधिया ने कहा, “125 लोगों की मौत हो गई। मैं मत विभाजन की मांग करता हूं।”
इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि शोरगुल के कारण वह विपक्षी सदस्यों की बातें नहीं सुन पाईं, जिसके बाद विपक्षी सदस्यों ने सदन से बहिर्गमण किया।
प्रधानमंत्री ने नेहरू-गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए विपक्षी कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस ने सबकुछ केवल एक परिवार की खातिर किया।
मुझे चुनाव की चिंता नहीं, मुझे अपने देश की चिंता है
मोदी ने साथ ही अपनी सरकार के नोटबंदी के कदम का बचाव भी किया और कहा कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था को कर चोरी और काले धन से बचाने के लिए सही समय पर लिया गया सही निर्णय है। उन्होंने हालांकि नोटबंदी के दौरान बैंकों तथा एटीएम के बाहर कतारों में खड़े होने के दौरान 125 लोगों की मौत का कोई जिक्र नहीं किया।
चर्चा में शामिल कई विपक्षी पार्टियों ने नोटबंदी के कारण 125 लोगों की मौत का मुद्दा उठाया।
मोदी ने कहा, “यह कदम बिल्कुल सोच-समझ कर उठाया गया था। यह निर्णय दिवाली के बाद लिया गया, जब देशभर में व्यापार जोरों पर था।”
मोदी ने कहा, “स्वच्छ भारत की तरह ही नोटबंदी का कदम भारत को (भ्रष्टाचार और कालेधन से) स्वच्छ करने के लिए उठाया गया।”
उन्होंने कहा कि वह इसका राजनीतिक जोखिम समझते हैं।

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