मे नित्य अपने मन मे उभरते
हुए विचारो को कलम के माध्यम से ब्लॉग द्वारा अपने विचारो को रखता हु व आप
सभी मित्रो से साझा करता हु आज मेरी माँ का एक ममतामयी झूठ मेने देखा वह
झुठ मेरी माँ ने मुझसे बोला मे तुरंत समझ भी गया की मेरी माँ मुझसे झुठ बोल
रही है आंखो मे आँसू भर आए माँ के ममतामयी झुठ से सोचा क्यू न आप सभी
मित्रो से साझा करू ! वेसे यह साधारण सी बात है मगर मेरे मन व दिल के साथ
अंतरात्मा ने आवाज दी मुझे आज कुछ इसी विषय पर लिखना चाहिए ! वेसे
माँ मे त्रिदेव ब्रह्म , विष्णु , महेश का वास होता है ! माँ का वर्णन
अतुल्यनिय है ! माँ के लिए अगर हम कागज व कलम लेकर बेठ जाये तो कागज कम पड़
जाएंगे ! हुआ यह की मेरी माँ व पापा राजस्थान जन्मभूमि से आज सुबह लोटे !
गाव से लोटते समय मेरी बहन ने माँ व पापा के लिए टिफिन पेक करके दिया !
जिसमे कुछ पराठे , आचार , चटनी व नमकीन ! शायद पराठे ज्यादा थे कुछ बच गए
ओर मुझे राजस्थान से मेरे कोई पारिवारिक सदस्य आते है ओर साथ मे पराठे लाते
है न जाने क्यू स्वादिस्ट लगते है भले वह ठंडे हो क्यू की जन्मभूमि के
पानी का स्वाद ही ऐसा है की हर खाध्य वस्तु सब्जी हो या पराठे स्वादिष्ट
बनते है ! जेसे ही माँ व पापा घर आए माँ से मेने पूछा पराठे है माँ ने कहा
हा पराठे हमने रात को बस मे नही खाये पड़े है 4-5 पराठे मगर मेने पहले ही
नाश्ता कर लिया था माँ को बोला बेटा जब शॉप पर आएगा पराठे व आचार चटनी भेज
देना ! जेसे ही घर से दुकान के लिए निकलने लगा याद आया पराठे तो घी के बने
होंगे ओर मेने 5 दिन पूर्व एक मन्नत के रूप मे घी का त्याग किया हुआ है
क्यू की 5 दिन से घी नही खा रहा हु ! माँ को बोला पराठे तो घी के बने है मत
भेजना माँ बोली आज तो खा ले मेने ना बोला ओर घर से बाइक से दुकान के लिए
निकल गया 2 किलोमीटर की पहुचा की माँ ने कॉल किया अरे मे तो भूल गयी अभी
तेरे बहन को कॉल किया वो बोल रही थी पराठे तो तेल के बनाए है ! क्या मे भेज
दु ? जेसे ही मेने माँ के मुह से सुना मे समझ ही गया मेने घी नही खाने के
कारण माँ से बोलने के बाद भी पराठे नही खाये इसलिए माँ झुठ बोली मगर यह माँ
का झुठ ममता से ओतप्रेत है एक क्षण सोचने लगा सच माँ की ममता का कोई मोल
नही यह माँ की ममता अनमोल है क्यू की पराठा खाने का बोल कर सिर्फ घी के
त्याग के कारण नही खाया तो माँ का दिल दुखा ओर मुझसे झुठ बोल दिया ! एक माँ
को अपने बच्चो से कितना प्यार होता है सर्वविदित है फिर भी माँ के लिए इस
ब्लॉग से आप सभी से साक्षात्कार इसलिए करना उचित समझा की चाहे कितने मंदिर ,
मस्जिद , चर्च चले जाओ मगर माँ के कदमो मे जो जन्नत कहु या स्वर्ग हमे ओर
कंही नही मिल सकता ! आज कहना चाहूँगा एक नारी के रूप जितनी भी माँ है उन्हे
मे नमन करता हु .....
माँ के लिए चंद लाइन .......
ऊपर जिसका अंत नहीं,
उसे आसमां कहते हैं,
जहाँ में जिसका अंत नहीं,
उसे माँ कहते हैं!
माँ है मंदिर मां तीर्थयात्रा है,
माँ प्रार्थना है, माँ भगवान है,
उसके बिना हम बिना माली के बगीचा हैं!
उत्तम जैन (विद्रोही )
माँ के लिए चंद लाइन .......
ऊपर जिसका अंत नहीं,
उसे आसमां कहते हैं,
जहाँ में जिसका अंत नहीं,
उसे माँ कहते हैं!
माँ है मंदिर मां तीर्थयात्रा है,
माँ प्रार्थना है, माँ भगवान है,
उसके बिना हम बिना माली के बगीचा हैं!
उत्तम जैन (विद्रोही )

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