Wednesday, 21 December 2016

नोटबंदी से परेशान सूरत का टेक्सटाइल , विवर व कामगार

सूरत -फ़ैक्ट्री के सायरन की आवाज़ सुनते ही मज़दूरों की बाहर के ठेलों की तरफ ‘किफायती खाने’ के लिए होड़ मचने वाली सूरत के टेक्सटाइल व डाइंग इंडस्ट्रीज मे नोटबंदी के सूनापन दिखने लगा है ! इनमे से ज़्यादातर बुनकर हैं या ज़री का काम करने वाले हैं और लगभग सभी के घर या तो बिहार में है या उत्तर प्रदेश में गुजरात के सूरत शहर के बाहर ये पांडेसरा का इलाका है उत्तर प्रदेश और बिहार के बुनकरों की तादाद यहाँ सबसे ज़्यादा है और लगभग सभी वर्षों से सूरत में बस चुके हैं.लेकिन नोटबंदी की घोषणा के बाद से पास के गणेश नगर में रहने वालों में से बहुतों ने घर लौटने की ठान ली है “फैक्ट्री मालिक पहली बार तनख़्वाह चेक से दे रहे हैं. अब परिवार में एक आदमी का ही बैंक खाता है.कामगार लाइन में लगें या काम पर जाएं, . इससे अच्छा तो घर जा कर खेती शुरू करें”.सूरत की गिनती भारत में बड़े टेक्सटाइल बाज़ारों में होती आई है. भारत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री में से 7 लाख पावरलूम सूरत में मौजूद हैं जिनमें रोज़ करीब 3.5 करोड़ मीटर कपडा बुना जाता है. ज़िले की टेक्सटाइल इंडस्ट्री में आठ लाख से ज़्यादा लोग काम करते हैं लेकिन नोटबंदी के बाद से कारोबार पर गहरा असर पड़ा है.सूरत के पांडेसरा वीवर्स फ़ेडरेशन का भी मानना है कि इस दौर से उबरने में एक-दो महीने और लगेंगे.उन्होंने बताया, “इस सीज़न में पूरे भारत में 50 लाख शादियाँ थीं. नोटबंदी के चलते इनमें से 90% शादियों के खर्चे कम करने पड़े. शादी में टेक्सटाइल का बड़ा रोल है. “उसका हमारी इंडस्ट्रीयो पर बहुत फर्क पड़ा क्योंकि लगभग सभी ऑर्डर कैंसिल हो गए. हमारा माल गांवों में ज़्यादा बिकता है. जब वहां कैशलेस काम शुरू होगा तभी हमारी अर्थव्यवस्था पटरी पर आएगी”.सालों से सूरत में बातौर बुनकर काम करने वाले एक कामगार ने इस बात पर संतोष जताते हुये बताया कि उनका परिवार अब भी उत्तर प्रदेश के फ़तेहपुर ज़िले में रहता है.उन्होंने कहा, “फैक्ट्रियों में काम आधा हो गया है. तीन दिन काम होता हैं, चार दिन बंद पड़ी रहतीं हैं. अब हमें काम तो यही आता है, इसलिए चार दिन हम भी बेरोज़गार रहते हैं. “जितना ज़्यादा परिवार यहाँ रहता उनकी दिक्कत ही बढ़ती”.भारत में पॉलिएस्टर का भी सबसे बड़ा काम सूरत में है तो यहाँ साडी बनाने वाली बड़ी कंपनियां भी मौजूद हैं. फैक्ट्रीयां भी नोटबंदी की चपेट में है. “शुरू में तो कई दिन फैक्ट्री का काम रोकना पड़ा था. वर्कर लोगों पर तो असर पड़ा ही है, कारोबार पर भी मार दिख रही है”. सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री से भारत सालाना 100 करोड़ से ज़्यादा के कपडे का निर्यात करता है.लेकिन जानकारों के मुताबिक़  आगे पढ़े 

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