Saturday, 24 December 2016

इस्तीफा देने का कोई दबाव नहीं, पीएम मोदी ने कहा था पद पर बने रहो: जंग

दिल्ली के उपराज्यपाल पद से अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंकाने वाले नजीब जंग ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि उन पर किसी तरह का दबाव नहीं था। वे पहले ही त्याग पत्र देना चाहते थे। इस बारे में उन्होंने दो बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया था, लेकिन पीएम ने उन्हें पद पर बने रहने को कहा था। जंग ने प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंचकर करीब एक घंटे तक मोदी से चर्चा की। सूत्रों की मानें तो यह शिष्टाचार भेंट थी। जंग ने गुरुवार को अपने त्याग पत्र के साथ जारी किए गए संक्षिप्त बयान में पीएम मोदी को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया था।पीएम से मिलने के बाद पत्रकारों से बातचीत में जंग ने कहा कि उनके फैसले के पीछे कोई राजनीतिक कारण नहीं हैं। वे सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में अपने अनुभव को आगे बढ़ाना चाहते हैं। उधर, गृहमंत्रलय के अनुसार जंग ने बुधवार को ही अपना त्याग पत्र सीधा राष्ट्रपति को भेज दिया था।
‘एलजी एक साल से पद छोड़ना चाहते थेउपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शुक्रवार को कहा कि एलजी नजीब जंग एक साल से अपना पद छोड़ना चाहते थे। एलजी के इस्तीफे के एक दिन बाद ही सिसोदिया ने यह बयान दिया है। सिसोदिया शुक्रवार सुबह 10 बजे नजीब जंग से मुलाकात करने राजनिवास पहुंचे थे। इसके पहले मुख्यमंत्री अर¨वद केजरीवाल ने भी जंग से मुलाकात की। जंग और केजरीवाल के बीच नाश्ते पर हुई मुलाकात लगभग एक घंटे तक चली। सिसोदिया ने कहा कि उपराज्यपाल ने शिक्षा के क्षेत्र में अब तक किए गए कार्यो पर उनसे खुलकर चर्चा की। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में काम करने की अपनी इच्छा भी जाहिर की।सिसोदिया ने कहा कि उपराज्यपाल जंग ने बतौर शिक्षा मंत्री अब तक दिल्ली में किए गए कार्यो के लिए उनकी सराहना भी की। उधर, केजरीवाल ने जंग के इस्तीफे के फैसले के बारे में पूछे जाने पर कहा कि जंग ने उन्हें अपने इस कदम के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी है। इसलिए मेरी नजर में उनके इस्तीफे का आधिकारिक कारण व्यक्तिगत ही होगा। गौरतलब है कि गुरुवार को केजरीवाल ने जंग के इस्तीफे पर हैरानी जताते हुए उन्हें भविष्य की शुभकामनाएं दी थीं।जंग से मुलाकात के तुरंत बाद केजरीवाल अपने आगे के सफर पर जयपुर के लिए रवाना हो गए। मुख्यमंत्री ने बताया कि उपराज्यपाल से उनकी सभी पहलुओं पर चर्चा हुई है। जंग ने गुरुवार को इस्तीफा दिया था। इस्तीफे के अगले ही दिन शुक्रवार सवेरे वह उनसे मिलने राजनिवास पहुंचे, जहां करीब आधे घंटे तक उन्होंने दिल्ली से जुड़े तमाम मुद्दों पर चर्चा की।
उपराज्यपाल के इस्तीफे के बाद बीजेपी ने ‘आप’ पर निशाना साधा है। भाजपा ने कहा कि नए उपराज्यपाल के आने के बाद भी दिल्ली सरकार की जंग जारी रहेगी। टकराव खत्म नहीं होगा। उपराज्यपाल के इस्तीफे के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने शुक्रवार को यह बयान दिया। मनोज तिवारी ने कहा, कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नौटंकीबाज हैं। वह कब कौन सी नौटंकी करेंगे, इसका किसी को पता नहीं है।
उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने दिल्ली को एक कुटिल राजनीतिक अखाड़ा बनाकर छोड़ दिया है। वे उपराज्यपाल के इस्तीफे तुरंत बाद एकाएक राजनीतिक शिष्टाचार दिखाने के लिए पहुंच गए, जबकि जंग के कार्यकाल में उन्हें कभी उचित सम्मान नहीं दिया। वहीं, कांग्रेस ने 2004 से लेकर केवल 2014 तक केवल डील की है। इसलिए उन्हें हर निर्णय के पीछे केवल डील ही नजर आती है।
कांग्रेस ने उपराज्यपाल नजीब जंग के इस्तीफे को शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से जोड़ा है। शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने कहा कि केजरीवाल सरकार के असंवैधानिक कार्यो को उजागर करने वाली शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से बचाने के लिए भाजपा ने जंग को पद से हटाने का प्रपंच रचा है। माकन ने गुरुवार को भी जंग के अचानक इस्तीफे को केजरीवाल और मोदी सरकार के बीच हुए गुप्त समझौते का परिणाम बताता था।उन्होंने केन्द्र सरकार से इस्तीफे के कारण उजागर करने की मांग की है। माकन ने कहा, शुंगलू कमेटी ने पहले ही उपराज्यपाल को रिपोर्ट सौंप दी थी। अब इसे सार्वजनिक होने से बचाने के लिए जंग का इस्तीफा करवाया गया। माकन ने बताया कि नोटबंदी के विरोघ में पार्टी कार्यकर्ता मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए आज जंतर मंतर से मार्च करेंगे।

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