Wednesday, 28 December 2016

पटवा ने राजनीति को नई दिशा दी थी, उनके बिना मप्र अधूरा:सीएम

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि स्व.पटवा ने मध्य प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दी थी। वे अजातशत्रु राजनेता थे और प्रदेश की जनता के दिलों पर राज करते थे।सीएम ने कहा कि स्व.पटवा का सभी दल सम्मान करते थे। उनके बिना मध्य प्रदेश की राजनीति की कल्पना नहीं की जा सकती। उनका देश के सार्वजनिक जीवन में विशिष्ट स्थान था। वे अदभुत राजनेता थे। उनके जाने से देश और प्रदेश के सार्वजनिक जीवन में आई रिक्तता की भरपायी नहीं की जा सकती। पटवा के बिना मध्य प्रदेश अधूरा है। ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति और परिजनों को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व.पटवा के निधन पर प्रदेश में तीन दिन का राजकीय शोक रहेगा।- जनसंपर्क, जल संसाधन तथा संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मंत्री मिश्रा ने कहा कि पटवा के निधन के साथ ही राजनीति का एक युग समाप्त हो गया है।
– किसान-कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने पटवा के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पटवा के चले जाने से उन्हें पारिवारिक एवं व्यक्तिगत क्षति हुई है। उन्हें राजनीति में लाने एवं मार्गदर्शन देने में पटवा की हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
– वाणिज्य-उद्योग,रोजगार, खनिज साधन तथा प्रवासी भारतीय मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने पटवा के निधन को अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा है कि प्रदेश ने अपनी एक अलग पहचान तथा गम्भीर कार्यशैली का महान नेता खो दिया है।
– सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विश्वास सारंग ने पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ राजनेता सुंदरलाल पटवा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि पटवा की पाठशाला में राजनीति के जो गुर सीखे वह हमें अनुशासित रहकर समर्पण, कर्मठता से जन-कल्याण के काम करने की प्रेरणा देते थे। उन्होंने अपने जन्मदिन (29 दिसंबर) के सारे कार्यक्रम निरस्त कर दिए हैं।
-नगरीय विकास एवं आवास मंत्री माया सिंह ने पटवा के निधन को अपूरणीय क्षति बताया है। उन्होंने कहा कि उनके निधन से हम सभी लोग बेहद दु:खी हैं। वे एक कुशल प्रशासक, योग्य राजनेता और भाजपा के स्तंभ थे।

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