Friday, 23 December 2016

राहुल के बयानों पर मोदी ने कहा- खुशी है वे बोलना सीख रहे हैं, अब पता चला कि भूकंप की संभावना खत्म हो गई है

वाराणसी.नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कांग्रेस के तीन बड़े नेताओं पर तंज कसा। राहुल गांधी के ‘भूकंप’ और ‘पर्सनल करप्शन के सबूतों’ पर कहा, ”मुझे खुशी है कि वे बोलना सीख रहे हैं। उन्होंने बोलना शुरू किया तो पता चला कि भूकंप की संभावना खत्म हो गई है। 2009 में पता नहीं चला था कि इस पैकेट में क्या है। अब पता चल रहा है।” वहीं, नोटबंदी को त्रासदी बताने के मनमोहन सिंह के बयान और गांवों में कैशलेस ट्रांजैक्शन्स पर उठाए पी. चिदंबरम के सवालों का भी उन्होंने जवाब दिया। मोदी ने विपक्ष के विरोध की तुलना आतंकियों को दिए जाने वाले पाकिस्तान के कवर फायर से की।
मोदी के भाषण-
1# ‘राहुल ना बोलते तो भूकंप आ जाता’
– मोदी गुरुवार को काशी के दौरे पर पहुंचे। बीएचयू में संस्कृति महोत्सव में उन्होंने कहा- “मुझे खुशी है कि वे (राहुल) बोलना सीख रहे हैं। जब से उन्‍होंने बोलना सीखा है, बोलना शुरू किया है, मेरी खुशी का ठिकाना नहीं है। 2009 में पता ही नहीं चलता था कि इस पैकेट के अंदर क्‍या है? अब पता चल रहा है कि क्‍या है।”
– मोदी ने कहा- “अच्‍छा हुआ वे कुछ तो बोले। ना बोलते तो बड़ा भूकंप आ जाता। इतना बड़ा भूकंप कि देश 10 साल तक उससे निपट नहीं पाता। बोलने लगे तो भूकंप की संभावना भी खत्म हो गई।”
– ”वे कहते हैं कि जिस देश में 60% लोग अनपढ़ हों, वहां मोदी ऑनलाइन बैकिंग की बात कैसे कर सकता है? मुझे बताइए, कोई पढ़ा-लिखा था तो मैंने कोई जादू-टोना किया कि वे अनपढ़ हो गए? ये 60% अनपढ़ थे। ये किसका रिपोर्ट कार्ड आपने दिया? जरा बताओ तो? ये क्या कर रहे हैं ये, इनको भी पता नहीं है। किसी का कालाधन खुल रहा है तो किसी का काला मन।”
राहुल ने क्या कहा था?
– 9 दिसंबर :
संसद परिसर में राहुल ने कहा था, ”नोटबंदी हिंदुस्तान के इतिहास का सबसे बड़ा स्कैम है। मुझे बोलने नहीं दिया जा रहा है। बोलूंगा तो देखिएगा कैसे भूकंप आता है।”
– 14 दिसंबर :राहुल ने फिर संसद परिसर में कहा, ”मेरे पास मोदीजी के पर्सनल करप्शन की इन्फॉर्मेशन है। लेकिन हमें संसद में बोलने नहीं दिया जा रहा।”
– 21 दिसंबर :राहुल ने गुजरात के मेहसाणा में रैली में कहा, ”सहारा कंपनी पर रेड हुई थी। वहां से मिली डायरी में लिखा था कि 6 महीने में मोदी को 9 बार पैसे दिए गए। ढाई साल के दौरान इसकी जांच क्यों नहीं हुई?”
2# ‘मनमोहन अपना रिपोर्ट कार्ड दे रहे हैं या मेरा?’
– मोदी ने कहा, “मनमोहन सिंह 1971-72 से लगभग हमेशा देश की अर्थव्‍यवस्‍था की कोर टीम में रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि जिस देश में 50 प्रतिशत लोग गरीब हों, वहां इस तरह की टेक्‍नोलॉजी कैसे हो सकती है? अब आप मुझे बताइए कि वे अपना रिपोर्ट कार्ड दे रहे हैं या मेरा। ये 50 प्रतिशत गरीबी की किसकी विरासत झेल रहा हूं?”
मनमोहन ने क्या कहा था?
– 24 नवंबर :
मनमोहन सिंह ने राज्यसभा में कहा था, “लोगों की बचत को ब्लैकमनी के रूप में कलंकित करना और सैकड़ों-लाखों गरीब लोगों के जीवन को परेशानी में डाल देना एक बड़ी त्रासदी है।”
3# चिदंबरम को जवाब- क्या मैंने आकर गांवों में लगे खंभे उखाड़ दिए?
– मोदी ने कहा, “उनके एक और नेता हैं जो वित्त मंत्री रहे हैं चिदंबरमजी। उन्होंने कहा कि हमारे देश में 50 प्रतिशत गांवों में अभी भी बिजली नहीं है तो कैशलेस कैसे करोगे? अब बताइए, यह किसकी देन है? आप ही कहते थे कि हमने बहुत विकास किया था। तो क्‍या मैंने आकर गांवों में लगे बिजली के खंभे उखाड़ दिए?”
चिदंबरम ने क्या कहा था?
– 13 दिसंबर :
चिदंबरम ने कहा था कि नोटबंदी इस साल का सबसे बड़ा स्कैम है। देश के 50 फीसदी गांवों में लाइट नहीं है। कैशलेस इकोनॉमी कैसे गांव में सक्सेस होगी?
4# मोदी ने कहा- जैसा बॉर्डर पर होता है वैसा संसद में हो रहा है
– मोदी ने कहा- “आपको पता है कि पाकिस्‍तान घुसैपठियों को भारत में भेजने के लिए सीमा पर फायरिंग शुरू कर देता है। इससे सुरक्षा बलों का ध्‍यान भटक जाता है और आतंकी लपक कर घुस जाते हैं।”
– “इन दिनों संसद में आपने देखा होगा, तू-तू, मैं-मैं होती है। इससे ध्‍यान भटकाया जाता है। बेईमानों को बचाने के लिए, उन्‍हें रास्‍ता दिखाने के लिए तरह-तरह की तरकीब अपनाई जा रही है।”
किस तरफ था पीएम का इशारा
– पार्लियामेंट के विंटर सेशन में नोटबंदी पर हंगामे की वजह से कामकाज नहीं हुआ। लोकसभा में 15% तो राज्यसभा में 19% ही प्रोडक्टिविटी रही है। मोदी सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में लोकसभा की सबसे कम प्रोडक्टिविटी रही। सिर्फ 2 बिल पास हो सके।
5# नोटबंदी पर विरोधियों से कहा- लाइन में लगे लोगों को नमन करें
– मोदी ने कहा- “देश ईमानदारी के रास्ते पर चल रहा है और विरोधी अपना संतुलन खो रहे हैं। राजनेताओं से कहना चाहता हूं कि सवा सौ करोड़ देशवासी अपने स्वार्थ के लिए नहीं, देश के लिए लाइन में लगे हैं, इनको जितना नमन करें, कम है।”
– “लोग कहते हैं कि मोदी ने बड़ा फैसला ले लिया, लेकिन उनको अनुमान नहीं था। यह बात सही है कि इस फैसले को लागू करने से पहले मैंने बहुत सी बातें सोची थीं, बहुत सी चीजों का अनुमान किया था, लेकिन मैं एक चीज का अनुमान नहीं कर पाया था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि देश के कुछ नेता और राजनीतिक दल हिम्‍मत के साथ बेईमानों के पक्ष में खड़े हो जाएंगे।”

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