Tuesday, 13 December 2016

मेरी भी सुनो …. निसंदेह मोदी जी कर्मठ ओर ईमानदार है पर

निसंदेह मोदी जी कर्मठ और ईमानदार हैं। सच्चे मन से भारत की सेवा करने की जुझारूपन भी दीखता है। लेकिन वे जादूगर की छवि बनाने की हसरत या फिर लोगों को विस्मित-भौंचक कर देने की चाहत का त्याग नहीं कर पाते हैं। जरा याद कीजिए और थोड़ा-माथे पर बल देकर सोंचिए- 8 नवम्बर की संध्या जब वे टीवी पर नोटबंदी का घोषणा – कहु या जयघोष करने आये। उनकी प्रस्तुती कमाल की थी । जैसे कोई रोमांचक शो का एंकर एंकरिंग कर रहा हो। देखिए इस अनोखे एंकर की विस्मयकारी प्रस्तुती की रणनीति ! घोषणा करनी है नोटबंदी की और अपने पास बैठा रखे हैं तीनो सेनाओं के प्रमुखों को। जरा सोंचिए, उस समय उनके दिमाग में क्या चल रहा होगा? वो जो सब कुछ चल रहा होगा उनके दिमाग में , वो सब आम जनता को होनेवाली समस्या को विस्मृत कर दिया। बस, मैं यही कहना चाहता हूँ। कि अगर वे नोटबंदी के साथ-साथ जनता की समस्या पर सोंच लिए होते तो जनता की यह सूझबूझ-बिहीन-जनित समस्या नही भुगतना पड़ता। मैं कोई आर्थिक मामले का विशेषज्ञ तो नहीं हूँ कि कुछ राय दे सकूँ। हाँ, इतना जरुर है कि अगर वे लोगों को भौंचक-अचरज कर देने की प्रवृति नहीं रखते तो 500/1000 के नोट बंद करने के मामले में कुछ अलग तरीके से फैसला लेते, नए नोटों का बेहतर प्रबंधन करते और पुख्ता तैयारी करते तो आज नोटबंदी के 36 दिन बीत जाने के बाद भी आम जनता में जो मारा-मारी की स्थिति है, वह नहीं होता या फिर इसे कम किया जा सकता था। आम जनता में जो बेहाली का माहौल है वह पीएमओ में बैठ कर नहीं देखा-समझा जा सकता है। हमारे सरकार में बैठे लोग भी यह मान रहे है कि अभी यह समस्या एक-दो महीने तक बना रहेगा। यानी तत्काल समाधान के लक्षण दिख नहीं रहा है। कालाधन और भ्रस्टाचार पर प्रहार जरूरी और जनता के आकांक्षा एवं चुनावी वादे के अनुरूप है। सराहनीय-प्रशंसनीय है। परंतु हर हाल में जनता का ख्याल रखना जरूरी है।
मोदी व्यक्तित्व पर एक और बात दावे के साथ आप कह सकते हैं। वे जितना काम करते हैं उससे कई गुना हवा बनाते हैं और लोगो में उसके प्रति विश्वास जागते हैं। ( अगर आप मोदी-अंधभक्त हैं तो यह सोंच कर खुश न हों कि यह तो अच्छी बात है क्योंकि ” गरीबी हटाओ” के नारे के साथ इंदिरा जी जो उम्मीद जगाई थी , उससे बड़ी उम्मीद कोई भी नहीं जगा पाया लोगो में और उसके बाद आप परिणाम भी जानते है। कि गरीबी मिट गयी भारत से।) विशेषज्ञ भी मानते है कि मोदी और भाजपा का मीडिया-प्रचार तंत्र बहुत सक्रिय और सशक्त है। वे जो बात कहना चाहते है वे बडी आसानी से लोगो तक पहुँच जाती है। इतने कष्ट-दुःख-दर्द झेलने के बाद भी लोग मेरे जेसे विद्रोही नहीं हुए तो बस इसका एक महत्वपूर्ण कारण यह है कि मोदी जी जनता में ये बात पहुँचने में सफल रहे -”यह बस कुछ दिनों का कष्ट है…फिर तो ऐसा भारत बनेगा जो भ्रष्टाचार-कालेधन से मुक्त होगा( शानदार भारत ) ओर हिंदुस्तान की भोली जनता अच्छे दिनो… इस नोटबंदी से कालेधन वाले पर तो बहुत गहरा चोट पड़ा है… उसका दिन की चैन और रात का नींद हराम हो गया है… उनकी सारी सम्पति मिट्टी- पानी, सही कहें तो ‘महज कागज का टुकड़ा’ रह गया है… वही लोग नोटबंदी पर शोर-विरोध कर रहे हैं महज स्वार्थवश…कालेधन सरकारी खजाने में आएगा… और भारतीय अर्थव्यवस्था तो बस कहिए का सपना सँजोये आज भी बेठी है की शायद अच्छे दिन आएंगे ही … जनता भी यह सोचा ये अपनी आख्रिर लाइन है… इसके बाद आपको कभी लाइन में लगना नहीं पड़ेगा… 70 वर्ष से लाइन में लगने की पीड़ा आप झेल रहे है… बस एक और बार झेल लीजिए… कभी भी आपको लाइन में नहीं लगना पड़ेगा… मतलब शानदार भारत… भृष्टाचार-मुक्त भारत… समृद्ध भारत… आपका भारत… आपके सपनो का भारत…’’ निसंदेह केशलेस की ओर 20% जनता ने कदम रखा है भविष्य मे यह आंकड़ा 35से 40 प्रतिशत भी हो सकता है मगर बाकी 60प्रतिशत जनता का क्या ?
खैर, आगे बढ़ते हैं। कालेधन पर प्रहार और उसके विरूद्ध उठाए गए क़दमों के नतीजे तथा इसका सही-सही आकलन तो कुछ समय बाद ही हो पायेगा। जबकि संशयपूर्ण अपेक्षा कर रहे हैं कि 50 दिनों में सामान्य स्थिति बहाल होगी, कालाधन आएगा और हमारी अर्थव्यवस्था नया रिकॉर्ड स्थापित करेगा।
मोदी जी ने “कांग्रेस मुक्त भारत” का नारा दिया था, लेकिन भारतीय जनता देख रही है कि कांग्रेस के संकीर्ण-अलोकतांत्रिक (और अगर नोटबंदी के पूर्व भाजपा ने देश के 600 से अधिक जिलों में कार्यालय हेतु जमीन खरीदी है तो “भ्रष्टाचारी” भी ) तौर-तारीके एवं शासन-पद्धति की राह पर भाजपा भी चल रही है। दिल्ली में अरबिन्द केजरीवाल के साथ टकराव और जम्मू-कश्मीर में जो राजनीतिक गठबंधन -समीकरण एवं हालात हैं उसमें कांग्रेस के ही लक्षण दिखते हैं। कांग्रेस ने यह सब 70 सालों में सीखा और मोदी जी को सीखने में लगा सिर्फ ढाई  .... आगे पढ़े 

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