Saturday, 31 December 2016

मुलायम को नहीं मुख्यमंत्री बदलने का अधिकार, अखिलेश के पास हैं ये 3 ऑप्शन

सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने यूपी के सीएम अखिलेश यादव और पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव को 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया है। आज मुलायम सिंह यादव ने 176 विधायकों की बैठक बुलाई है। इस बैठक में मुलायम सिंह यादव विधायकों के सामने ये प्रस्ताव रख सकते हैं कि अखिलेश यादव की जगह किसी दूसरे नेता को विधायक दल का नेता चुनें। उधर चर्चा है कि अखिलेश आज इस्तीफ़ा देने की पेशकश भी कर सकते हैं। बता दें कि आज सुबह से ही अखिलेश के सरकारी आवास के बाहर विधायकों, मंत्रियों और समर्थकों जमावड़ा देखने को मिल रहा है। ख़बरों की माने तो 125 के करीब विधायक, दर्जनों मंत्री अब तक सीएम से मिलने पहुंच चुके हैं।
मुलायम क्यों नहीं बदल सकते सीएम- राजनीतिक जानकारों के मुताबिक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते मुलायम सिंह यादव को मुख्यमंत्री चुनने का अधिकार नहीं है। पार्टी के संविधान के मुताबिक सीएम चुनने का अधिकार सिर्फ विधानमंडल दल को ही होता है। विधानमंडल दल चाहे तो किसी निर्दलीय को अपना नेता चुनकर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठा सकता है। गौरतलब है कि सपा से निकाले जाने के बाद भी अखिलेश यादव एक विधायक हैं। ऐसे में ये विकल्प खुला हुआ है कि विधानमंडल चाहे तो उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाए रह सकता है।
1.चर्चा है कि अखिलेश आज इस्तीफ़ा भी दे सकते हैं। इसके आलावा अखिलेश अगर संख्या बल में कमजोर पड़े तो विधानसभा भंग करने की सिफारिश भी कर सकते हैं। सपा में टूट की स्थिति में नया चुनाव चिह्न हासिल करने के प्रयास के साथ रामगोपाल नई पार्टी का ऐलान कर सकते हैं।अखिलेश ने गुरुवार को 225 उम्मीदवारों की जो सूची जारी की थी उसमें 171 विधायक हैं। इनमें करीब सवा सौ विधायक ऐसे हैं जिनका नाम मुलायम की सूची में भी है। दोनों खेमे इन विधायकों पर अपना हक जता रहे हैं लेकिन ये विधायक किसके पाले में हैं, यह आज साफ होगा।
2. अगर अखिलेश के पास 171 विधायकों का संख्या बल उपलब्ध होता है तो वह कांग्रेस और अन्य छोटे दलों के सहयोग से अपनी सत्ता बचा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक अगर विधायकों की पर्याप्त संख्या उनके पाले में नहीं आया तो भी वो राजभवन जाकर विधानसभा भंग करने की सिफारिश देंगे। दूसरी तरफ मुलायम की बैठक में पार्टी के कुल 229 विधायकों में से ज्यादातर के पहुंचने पर अखिलेश को विधायक दल के नेता पद से हटाने का प्रस्ताव पारित कर विधायक दल का नया नेता चुना जा सकता है।
3. अखिलेश यादव या सपा से निकाले गए विधायकों पर दल बदल कानून लागू नहीं होता है। साथ ही उन विधायकों पर भी दल बदल कानून लागू नहीं होगा जो सपा से खुद इस्तीफा दिए बिना अखिलेश को समर्थन करेंगे। जबतक कोई विधायक खुद पार्टी से इस्तीफा नहीं दे देता उसपर दल बदल कानून नहीं लागू होता है।अखिलेश पर्याप्त बहुमत होने पर विधायकों की सूची विधानसभा अध्यक्ष को सौंपेंगे। तब विधानसभा अध्यक्ष आपात सत्र बुलाकर तय करेंगे कि अखिलेश यादव के पास बहुमत है या नहीं? बहुमत साबित हो जाने पर अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं।एक स्थिति ये भी है कि अगर अखिलेश को पार्टी के भीतर पर्याप्त समर्थन हासिल नहीं हुआ और रविवार को बुलाई गई आपातकालीन बैठक के बाद भी मुलायम ही राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहे तो विधानसभा में शक्तिपरीक्षण के दौरान पार्टी व्हिप जारी कर अखिलेश समर्थक विधायकों को मुश्किल में डाल सकती है।उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि उन्हें सपा में क्या चल रहा है इससे कोई मतलब नहीं है। वे पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। वे कोई भी फैसला कानून के दायरे में रहकर ही लेंगे। राज्य में राजनीतिक अस्थिरता पैदा होने के हालात में वे कोई फैसला लेंगे।
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं राम गोपाल यादव
बता दें कि प्रोफेसर राम गोपाल यादव ने रविवार को राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है। समाजवादी खेमे में इस बात की भी सुगबुगाहट है कि इस बैठक में प्रोफेसर रामगोपाल यादव को सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा सकता है। संभावना यह भी जताई जा रही है कि अगर चुनाव चिन्ह को लेकर बात फंसी तो कभी समाजवादियों का निशान रहे बरगद चुनाव चिन्ह को लेने की पहल होगी।

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