Saturday, 19 November 2016

नोटबंदी पर सबसे बड़ी रायशुमारी ……… विद्रोही की कलम से

मित्रो आखिर कब तक सिसकते रहोगे?
यारो बोलोगे नहीं तो कोई सुनेगा कैसे??
मोदी सरकार द्वारा 500 और 1000 के नोट बन्द करके 2000 का नोट जारी करने के निर्णय को प्रारम्भ में बहुत कम लोग समझ पाये। मगर जैसे ही जनता की सड़कों पर लम्बी कतारें नजर आने लगी राजनैतिक दलों ने प्रतिक्रिया देना शुरू की है। यद्यपि वास्तविकता को अभी तक भी सही तरीके से सामने नहीं लाया जा रहा है। इसे समझने के लिये सबसे पहले हमें इस बात को खुलकर स्वीकार करना होगा ! सभी राजनैतिक दलों के पास जो अकूत ”काला धन” आता है ! वह नगदी के रूप में अज्ञात स्थानों पर 500 एवं 1000 के नोटों के रूप में जमा रहता रहा है। चुनावी समर में अपवित्र तरीके से ”काला धन” खर्च किया जाता है। इस प्रकार ”काला धन” हमारे लोकतंत्र की वास्तविक आत्मा और राजनैतिक दलों की दुखती रग बन चुका है। ऐसे में वर्तमान केन्द्र सरकार द्वारा इस दुखती रग पर वार करके शेष सभी दलों की आत्मा को मार दिया गया है। अंधभक्तों और शातिर लोगों द्वारा राष्ट्र भक्ति की आड़ में इस निर्णय की प्रशंसा में गीत गाये जा रहे हैं। लेकिन इसके पीछे छिपी/निहित वास्तविकता को समझना बहुत जरूरी है।
लोकतंत्र की आवश्यक बुराई बन चुके ”काला धन” की आधारशिला पर खड़े भारत के लोकतंत्र को बचाने के लिये चालाकी से परिपूर्ण इस निर्णय के छद्म मकसद को जानना और समझना प्रत्येक भारतीय नागरिक के लिये बहुत जरूरी है। बल्कि संविधान की और राष्ट्र की रक्षा हेतु अपरिहार्य है। तो यह जाना जाये की तत्काल अपुष्ट, किन्तु महत्वूपर्ण स्रोतों से छन—छन कर जो जानकारी सामने आ रही है, वह अत्यधिक भयावह और हिला देने वाली है।
”काले धन” को बहुत आसानी से सफ़ेद धन में बदलकर भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगियों द्वारा उत्तर प्रदेश, पंजाब आदि राज्यों के विधानसभा चुनावों और लोकसभा के अगले आम चुनावों में पानी की भांति बहाया जा सकेगा, बल्कि नहाया जायेगा। गरीब वोटरों को आसानी से अपने पक्ष में दिग्भ्रमित किया जा सकेगा और, या खरीदा भी जा सकेगा और चुनावों के असली हथियार ”काला धन” से निहत्थी हो चुकी शेष सभी पार्टियाँ 
निरीह और असहाय अवस्था में चुनावी समर में अपनी हार को स्वीकारने को मजबूर होंगी। अब कुछ बाते जो आम आदमी जानता है हजारों करोड़ रुपये की जमीनें खरीदी गयी हैं। देशभर में हजारों करोड़ रुपये का सोना खरीदा गया है।देशभर में हजारों करोड़ रुपये रियल स्टेट में लगाये गये हैं।हजारों करोड़ विदेशों में जमा करवाया गया है। ओर सबसे बड़ा कटु सत्य की अपनी हैसियत और सत्ता से नजदीकी का दुरुपयोग करते हुए हजारों करोड़ों की राशि को 2000 के नोटों में बदलाया जा चुकाहै /ओर बदला जा रहा है। मगर कानो से बहरी आंखो से अंधी अंधभक्त चंद जनता भावनाओ व देश प्रेम के कारण समझने को तेयार नही एक वही राग अलापे जा रही है ओर साथ मे चंद मित्र हा मे हा मिलाकर खुद को देशभक्त समझने लगे है मित्रो मे भी हिंदुस्तान का नागरिक हु मुझे भी मेरे देश से अथाह प्यार है मे भी चाहता हु देश से कालाधन नाबूद हो ओर मे भी मोदी जी व मोदी सरकार का समर्थक हु मगर यह नही की उनकी सरकार के हर निर्णय को अंधभक्ति से समर्थन दु ! हर फेसले पर आप स्वयं चिंतन करो मनन करो जरूरी नही मे हर बात सही कहु या आप सही कहो ! चिंतन व मनन करना होगा ! भविष्य के परिणामो पर गोर करना होगा ………
लेखक – उत्तम जैन ( विद्रोही )
प्रधान संपादक – विद्रोही आवाज़
मो- 8460783401
vidrohiawaz@gmail॰com

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