राजसमंद.यहां के द्वारकाधीश मंदिर में श्रद्धालुओं को डेढ़ साल से ठाकुरजी की नकली प्रतिमा के दर्शन करवाए जा रहे थे। दर्शनार्थियों की शिकायत पर सेवादार दर्शन में कभी असली तो कभी नकली प्रतिमा रखकर श्रद्धालुओं को गुमराह कर रहे थे। श्रद्धालुओं में शक गहराया तो शिकायत पर शनिवार शाम को बड़ौदा से गोस्वामी परिवार (मंदिर की सेवा करने वाले) बृजेशकुमार के बड़े भाई पीठाधीश्वर शिशिरकुमार और परागकुमार यहां पहुंचे तो मंदिर के गर्भ गृह में नकली प्रतिमा देखकर हंगामा कर दिया।
मंदिर में रखी थी एक जैसी दो मूर्ति… पीठाधीश्वर के बेटे ने यहां सेवा-पूजा करने वाले अपने चाचा बृजेशकुमार और उनके बेटे वागीश कुमार गोस्वामी पर असली प्रतिमा का तीन सौ करोड़ रुपए में सौदा करने का आरोप लगाते हुए कांकरोली थाने में केस दर्ज करवाया है। मामला बढ़ने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मंदिर पहुंचकर नकली प्रतिमा को सीलबंद करवा दिया है। मंदिर के गर्भ गृह में 21 जून 2015 को आगजनी के बाद से ही स्थानीय श्रद्धालु द्वारकाधीश की प्रतिमा के स्वरूप को लेकर संशय जता रहे थे। स्थानीय स्तर पर शिकायत के बावजूद इस पर ध्यान नहीं दिया तो श्रद्धालुओं ने बड़ौदा में इसी मंदिर की पीठ के शिशिरकुमार और परागकुमार को शिकायत कर दी। शनिवार शाम को दोनों भाई कांकरोली पहुंचे और सीधे मंदिर के गर्भगृह जा पहुंचे। गर्भगृह में द्वारकाधीश प्रभु की दो प्रतिमाएं देख उनके भी होश उड़ गए। बाद में उन्होंने नकली बताई जा रही प्रतिमा को मंदिर के चौक में रखवाकर पुलिस को सूचना दे दी।
पुलिस तक पहुंचा मामला- पीठाधीश्वर महाराज शिशिर कुमार के बेटे कपिल कुमार गोस्वामी ने कांकरोली थाने में मामला दर्ज कराया है। इसमें आरोप लगाया कि यहां सेवा-पूजा करने वाले गोस्वामी परिवार के ब्रजेश कुमार और वागीश कुमार असली मूर्ति का तीन सौ करोड़ रुपए में सौदा करने की कोशिश में थे। आरोप है कि नकली प्रतिमा के दर्शन कराने संबंधी वैष्णवों की शिकायत आना बंद होने पर ये असली प्रतिमा काे बेचने की फिराक में थे। डेढ़ साल से दर्शनार्थी जब भी प्रतिमा में हेरफेर की शिकायत करते तो दर्शन में नकली प्रतिमा हटाकर असली रख दी जाती।
असली और नकली प्रतिमा में यह फर्क- जानकार बताते हैं कि........
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