Wednesday, 20 September 2017

विधानसभा चुनाव - पाटीदार आंदोलन व जीएसटी आंदोलन से राजनीतिक परिदृश्य बदला

विधानसभा चुनाव-पाटीदार आन्दोलन ,जीएसटी आन्दोलन से राजनीतिक परिदृश्य बदला
टेक्सटाइल बाजार का बड़ा वोट बैंक है जो
जीएसटी लागू होने से खफा है।
राजनीति का केंद्र बना सूरत, 4 सीटों पर असर डालेंगे पाटीदार
सूरत. इस बार चुनाव से कई महीने पहले ही राजनीतिक हलचल शुरू हो चुकी है। भाजपा और कांग्रेस, दोनों पार्टियों की खास नजर सूरत पर है। पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राेड  शो, फिर कांग्रेस के दिग्गज अहमद पटेल का जीत का जश्न, मुख्यमंत्री के लगातार दौरे, फिर रुत्विक पटेल के पाटीदार इलाके में एक के बाद एक दौरे और कांग्रेस का युवा सम्मेलन। यह सब आयोजन इशारा कर रहे हैं कि सूरत की 12 विधानसभा सीटों पर दोनों दल इस बार जोर आजमाइश करेंगे।

 

जबकि, पिछले चुनाव में सभी सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। माना जा रहा है कि पाटीदार आरक्षण आंदोलन व जीएसटी आन्दोलन के बाद सूरत का राजनीतिक परिदृश्य बदल गया है। मुख्य तौर पर 12 में से 4 विधानसभा सीटों पर पाटीदारों का असर देखने को मिलेगा। तो 1-2सीट पर जीएसटी से खफा कपड़ा व्यापार्रियों का असर भी देखने को मिलेगा। भाजपा नेताओं के एक के बाद एक दौर इसलिए तेज हो गए हैं कि पाटीदार वोट छिटक गए तो एक भी सीट खोना भाजपा की प्रतिष्ठा पर चोट होगी। वहीं कांग्रेस काे उम्मीद इसलिए है कि पाटीदार बहुल चार सीटों में से एक भी मिली तो बड़ी राजनीतिक सफलता मानी जाएगी। ये प्रमुख चार विधानसभा क्षेत्र हैं कामरेज, करंज, वराछा और कतारगाम। इसके अलावा मजूरा लिम्बायत,उधना  और ओलपाड सीट पर भी पाटीदारो के साथ जीएसटी से खफा कपडा उद्योग से जुड़े मतदाता असर डाल सकते हैं। इन क्षेत्रों में 40 से 60 फीसदी वोट पाटीदार  समाज  व कपड़ा उद्योग से जुड़े लोगों के हैं।

टेक्सटाइल मार्केट का वोट बैंक असर
जीएसटी से खफा टेक्सटाइल व्यापारी भी सूरत के चुनाव में बड़ा फैक्टर साबित हो सकते हैं। 20 दिन लंबी हड़ताल और डेढ़ महीने लंबे आंदोलन के बावजूद कपड़ा व्यापारियों को खाली हाथ ही आंदोलन समेटना पड़ा। पिछले दिनों कांग्रेस के एक सम्मेलन में एक हजार से ज्यादा मारवाड़ी शामिल हुए। इसे देखते हुए दोनों पार्टियां इन वोटों पर भी नजर जमाए हुए हैं।

 
कांग्रेस प्रत्याक्षियों के चयन में असमंजस में।
सूरत. गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा में जहां  टिकट दावेदारों की होड़ लगी हुई है वहीं कांग्रेस में दावेदार ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। सूरत शहर की 12 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार चुनने के लिए कांग्रेस निरीक्षकों ने कई बैठकें की, लेकिन दो या तीन से ज्यादा इच्छुक उम्मीदवार नहीं आए। कांग्रेस प्रदेश निरीक्षकों के अलावा दक्षिण गुजरात में कांग्रेस के बड़े नेता माने जाने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री तुषार चौधरी और दक्षिण गुजरात के प्रभारी हर्षवर्धन सपकाल भी इच्छुक उम्मीदवारों की दावेदारी सुनने आए, लेकिन उनके सामने भी सूरत के कुछ प्रमुख नेताओं को छोड़ कोई ज्यादा दावेदार नहीं आए।

 

 
पिछले चुनाव में हारे प्रत्याक्षियों ने मांगे टिकट

पिछली बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव हारने वाले 6 प्रत्याशियों ने इस बार फिर से पार्टी से अपनी किस्मत आजमाने का मन बनाया है। सूरत कांग्रेस अध्यक्ष हसमुख देसाई ने दावा किया कि कांग्रेस चुनाव को लेकर पूरी तरह से तैयार है। अब सिर्फ चुनाव की घोषणा होने का इंतजार है। कांग्रेस की ओर से प्रत्याशी कोई भी हो इस बार पार्टी पूरी ताकत लगा कर विधानसभा चुनाव लड़ेगी।
सूरत पश्चिम और मजूरा में हुई कांग्रेस निरीक्षकों की बैठक में दावेदारों का इंटरव्यू लेने का कार्यक्रम एक औपचारिकता भर रहा। इन सीटों पर कोई उम्मीदवार रिस्क नहीं लेना चाहता है। दावेदारों की उदासीनता देखते हुए सूरत कांग्रेस के कुछ सीनियर नेता भी बेमन से अपनी ड्यूटी पूरी कर रहे हैं।मजूरा सीट से अशोक कोठारी पहले से तैयारी कर है।बलवंत जैन का नाम भी प्रत्याक्षी के रूप में बाहर आ रहा है।मजूरा सीट राजस्थानी बाहुल्य वोटर की है ।इस सीट से पिछला चुनाव में कांग्रेस की और से कपड़ा उद्योगपति  धनपत जैन ने लडा था।लेकिन भाजपा के हर्ष संघवी से हार गए थे।

 

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